11 July, 2017

K.D. Sharma - Blogger of the Month for June 2017


माह जून के बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द मंथ छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले से के.डी. शर्मा जी है। शर्मा जी 2009 से ब्लॉगिंग कर रहे है और वर्तमान में स्टील इंडस्ट्री से जुड़े हुए है।
दिन रविवार, दिनांक 4 जनवरी 2009 को शर्मा जी ने ब्लॉग दुनिया में कदम रखा, लेकिन अपनी मौलिक पोस्ट के साथ नही। उन्होने कार्टूनिस्ट काजल कुमार जी के कार्टून को अपनी पहली पोस्ट बनाया।
शर्मा जी ने वास्तव में ब्लॉगिंग की शुरूवात रविवार, 25 जनवरी 2009 को 'आजादी के बाद के बड़े घोटाले' पोस्ट के साथ की। शर्मा जी के ब्लॉग का नाम है 'समाज की बात'। उन्होने अपने ब्लॉग के नामानुसार ही ब्लॉग में पोस्ट लिखीं है। कहने का मतलब है कि उन्होने अपने ब्लॉग के शीर्षक के साथ पूरा न्याय किया है और पाठक को निराश नहीं किया है।
शर्मा जी के ब्लॉग पर आपको मनोरंजन, कवितायेँ, मुद्दे, भ्रष्टाचार, लघुकथाएं, घरेलू नुस्खें, मार्गदर्शन, साहित्यकारों का परिचय, धर्म के अलावा विभिन्न कॉलमों में बंटे हुए अन्य बेहतरीन लेख पढ़ने को मिलेंगे। उन्होने समाज के सभी वर्ग को लेकर अपनी पोस्ट लिखी है। कहीं उन्होने पर्यावरण को लेकर तो कहीं पर उन्होने स्वास्थ्य को लेकर भी अपनी पोस्ट लिखी है।
इसके साथ ही आपको बताते चलें कि शर्मा जी एक कहानीकार और कवि भी है। उन्होने अब तक 60 कवितायेँ, 3 कहानियां और 15 लघुकथाएं लिखीं है।
उन्होने अपनी कविताओं में गांवो में हो रही तरक्की को बहुत ही सुन्दर शब्दों में बयां किया है। देखें नीचें दी गई पोस्ट में।

गाँव में बिजली (कविता)

दिन भर खेतों में काम करके
मिटाने अपनी थकान
लोग बैठा करते थे शाम को
गाँव की चौपाल में
या बरगद या नीम के पेड़ के नीचे
बने हुए कच्चे चबूतरों पर
और होती थी आपस में
सुख-दुःख की बातें
और हो जाती थी कुछ
हंसी-ठिठोली भी
महिलायें भी मिल लेती थीं आपस में
पनघट पर पानी भरने के बहाने
और कर लेती थीं साझा
अपना-अपना सुख-दुःख
मगर अब गाँव में
बिजली आ जाने से
बदल गए हैं हालात
और सूने से रहने लगे हैं
चौपाल और चबूतरे
अब नहीं होती हैं पनघट पर
आपस में सुख-दुःख की बातें
गाँव में बिजली आ जाने से
अब आ गए हैं टेलीविजन
लग गए हैं नल भी अब घरों में
ख़त्म हो गए हैं बहाने
अब घर से निकलने के

पूरी कविता पढ़ने के लिए क्लिक करें।

वहीं उन्होने लघुकथाओं में भी अपना डंका बजवा दिया है। उनकी कहानियों को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे कि वो कहानी को अपने सामने ही शाक्षात देख रहे हो और उसका वर्णन कर रहे हो। आप भी पढ़े उनकी एक लघुकथा।

बड़े भाई (लघुकथा)

सन्डे की की सुबह-सुबह घंटी बजने पर पत्नी ने दरवाजा खोला तो सामने हाथ में एक बैग लिए पतिदेव के बड़े भाई खड़े थे। पत्नी ने अनमने भाव से उन्हें प्रणाम किया और सामने कमरे में ही उन्हें बैठाकर वापस बेडरूम पहुंची तो पति ने उंघते हुए पूछा “कौन है इतनी सुबह-सुबह?”। और कौन होगा"! आपके बड़े भाई साहब ही हैं। हर महीने आपसे मिलने चले आते हैं"।
“अब हमारी आज की पिकनिक का क्या होगा!” पति भी सोच में पड़ गया।
आज महीनों के बाद पिकनिक जाने की तैयारी बनी थी और बड़े भाई ने आकर पूरा प्लान ही चौपट कर दिया।
मगर बड़े भाई भी क्या करें भाभी 2 साल पहले ही गुजर चुकी हैं, दोनों बेटे अपनी नौकरी में ही व्यस्त रहते हैं। बहुएं भी उनका ध्यान नहीं रखती हैं इसलिए महीने में 1-2 दिन के लिए यहाँ पर आ जाते हैं। पत्नी थोडा भुनभुनाती जरूर है मगर पति संभाल लेता है।
पति भी उठकर बड़े भाई के पास गया। पांव छुए और हाल-चाल पूछने लगा।
1 घंटे के बाद फिर से दरवाजे की घंटी बजी। पति ने दरवाजा खोला तो सामने पत्नी के बड़े भाई सपरिवार खड़े थे। सब लोग अन्दर आये और हाल-चाल होने लगा।
पति ने थोडा मौका मिलते ही पत्नी से पूछा “क्यों जी अब हमारी पिकनिक का क्या होगा!”।
पत्नी ने आँखें तरेरते हुए कहा, “मैं खूब समझती हूँ तुम्हारे इशारे। ताने मत मारो, पंद्रह दिन के बाद तो मेरे भाई-भाभी यहाँ घूमने आये हैं और तुम्हें पिकनिक जाने की पड़ी है!”
पति ने चैन की सांस ली कि आज का दिन अच्छा गुजरेगा। पत्नी मेरे बड़े भाई को लेकर ताने तो नहीं मारेगी!......

शर्मा जी के ब्लॉग 'समाज की बात' को पढ़ने के लिए क्लिक करें।

इसके अलावा शर्मा जी ने एक ब्लॉग 'भंडाफोड़' 25 जनवरी, 2009 को शुरू किया था, यहां पर उन्होने कई बड़े भंडे फोड़े और उन्होने इस ब्लॉग पर 2 अप्रैल, 2014 को सीएपीडी के 147 कर्मचारियों अंतिम भंडा फोड़ कर किनारा कर लिया।
इसके साथ ही के.डी. शर्मा कई लघुकथाएं व कविताएं कई पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुई है। शर्मा जी को फेसबुक पर फालो करने के लिए यहां क्लिक करें।

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