01 July, 2017

मेहनती मजदूर | ब्लॉग ऊंचाईयां


जीवन : हर एक के लिये जीवन की परिभाषा अलग-अलग है।
जब तक हम स्वयं तक सीमित रहते हैं, तब तक हमें जीवन वैसा ही लगता है, जैसा हम देखते और सोचते हैं। परन्तु जब हम स्वयं से बाहर निकल कर समाज, देश, दुनियाँ को देखते हैं, तब ज्ञात होता है कि जीवन की परिभाषा सब के लिये भिन्न -भिन्न है।
मनुष्य जब तक स्वयं तक सीमित रहता है, वो सोचता है कि सबसे ज्यादा अभावग्रस्त वो ही है, जितनी मुश्किलें और बंदिशें उसके पास हैं, उतनी किसी के हिस्से में नहीं। परन्तु जब हम अपने घर से बाहर निकलकर देखते हैं तो ऐसे-ऐसे कष्टों में लोग जी रहे होते है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते, तब हम पाते हैं कि हम तो बहुत बेहतर जीवन जी रहे है, अभी तक हम बस यूँ ही रोते रहे।
मन ही मन को ढांढस बन्धता है, कहता है, देख ये कैसे-कैसे जीवन जी रहे हैं।
एक बार तपती दोपहरी में मेहनती मजदूरों को काम करते देख दिल पसीजा साथ में ही उनकी पत्नियां बच्चे सब के सब लगे हुए थे। कोई महिला इंठों का तसला सिर पर उठाए कोई रेते का बच्चे भी वहीं खेल रहे हैं मिट्टी में उन्हें कोई चिन्ता नहीं।

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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