06 June, 2017

Archana Tiwari - Blogger of the Month for May 2017


अर्चना तिवारी मई माह 2017 की Best Blogger of the Month है। अर्चना जी लखनऊ से है और एक अध्यापिका है। आप सन् 2008 से "पंखुड़ियां" ब्लॉग लिख रही है। 20 जनवरी 2008 को हिन्दी की स्थिति को लेकर को लेकर उन्होने अपने ब्लॉगिंग सफर की शुरूवात की।
अर्चना जी ने अपने ब्लॉग पर 2014 कविताएं, दोहे और समसामयिक छोटे लेख लिखे है और 2015 से लघुकथाएं भी लिख रहीं है। अर्चना जी ने अपने ब्लॉग पर बहुत कम लिखा है लेकिन जो कुछ भी उन्होने लिखा है वह प्रशंसनीय है। अपने इस ब्लॉग पर उन्होने समाज के विभिन्न पहलुओं और छोटे-छोटे प्रसंगों को लघुकथाओं का रूप देकर उसे पठनीय बना दिया है।
अर्चना तिवारी जी के ब्लॉग "पंखुड़ियां" से एक लघुकथा

फ़रिश्ता : लघुकथा

एक तो सड़ी गर्मी ऊपर से जाम में फंसी बस, सामने की सीट पर औरत की गोद में बच्चा दहाड़ें मार रहा था। उसकी बगल में बैठा आदमी बच्चे को गोद में लेकर कभी चुटकी बजा, कभी मोबाईल बजा, तो कभी उछाल कर फुसलाने की भरसक कोशिश कर रहा था। यह प्रक्रिया काफ़ी देर से चल रही थी इसलिए यात्रियों का भी ध्यान केंद्रित किए हुए थी, परेशान होकर उस आदमी ने बाहर झांका और बस से नीचे उतर गया, किसी तरह से वाहनों कूदते-फांदते थोड़ी देर बाद दूध लेकर लौटा।
धीरे-धीरे जाम छंटने लगा बस ने भी रफ़्तार पकड़ ली थी। थोड़ी देर बाद वह आदमी उठकर गेट पर आया उसकी शर्ट की एक बांह और पैंट गीली थी, उसने इशारे से बस रुकवाई और अपना बैग लेकर नीचे उतर गया बस फिर चल पड़ी, यात्रियों की नज़रें एक दूसरे से टकराईं जिसमें हर्षान्वित आश्चर्य था। बच्चा खिड़की पकड़ खड़ा किलकारी मार रहा था।

अर्चना जी के ब्लॉग "पंखुड़ियां" को पढ़े।

इसके अलावा अर्चना जी "कुछ लम्हे दिल के..." ब्लॉग भी लिख रही है। इस ब्लॉग की शुरूवात उन्होने 18 जून 2009 पोस्ट दिल गमगीन क्यूँ है? के साथ की। इस ब्लॉग पर उन्होने सिर्फ कविताओं को स्थान दिया है। यहां पर उन्होने कोशिश की है कि समाज को उनकी रचनाओं से प्रेरणा मिले। इस ब्लॉग पर उन्होने किसी रचना में प्रेरणा को आधार बनाया है तो कहीं पर उन्होने मानव मन को समझने का प्रयास किया है।
अर्चना तिवारी जी के ब्लॉग "कुछ लम्हे दिल के..." से एक कविता

कचरे की वस्तुएँ : कविता

इंसान बड़ा सयाना है
वह सब जानता है
कि उसे क्या चाहिए, क्या नहीं
नहीं रखता कभी
अपने पास, अपने आसपास
ग़ैरज़रूरी, व्यर्थ की वस्तुएँ
उन्हें फेंक देता है उठाकर
कचरे के डिब्बे में प्रतिदिन।
इंसान बड़ा सयाना है
नहीं फेंकता कुछ वस्तुएँ कभी
किसी भी कचरे के डिब्बे में
बेशक वे कितनी ही सड़-गल जाएँ
कितनी ही दुर्गन्धयुक्त हो जाएँ
उन्हें रखता जाता है सहेजकर
मन के डिब्बे में प्रतिदिन।

अर्चना जी के ब्लॉग "कुछ लम्हे दिल के..." को पढ़े।

अर्चना तिवारी जी स्कूल के अलावा भी इन दोनो ब्लॉगों के माध्यम से एक शिक्षक की भूमिका भी बेहतर तरीके से निभा रहीं है। ऐसा हम इसलिए कह रहे है क्योकिं उनके हर पोस्ट प्रेरक और मोटीवेट करने वाली होती है।

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