28 May, 2017

नारी ! अब तेरे कर्तव्य और बढ गये | नई सोच


बढ रही दरिन्दगी समाज में,
नारी ! तेरे फर्ज और बढ गये।
माँ है तू सृजन है तेरे हाथ में,
"अब तेरे कर्तव्य औऱ बढ गये"।

संस्कृति, संस्कार  रोप बाग में,
माली तेरे बाग यूँ उजड गये।
दया,क्षमा की गन्ध आज है कहाँ?
फूल में सुगन्ध आज है कहाँ?
ममत्व,प्रेम है कहाँँ तू दे रही?
पशु समान पुत्र बन गये।
नारी ! तू ही पशुता का नाश कर,
समष्ट सृष्टि का नया विकास कर ।
"नारी ! तेरे फर्ज और बढ गये"।
"अब तेरे कर्तव्य और बढ गये"।

मशीनरी विकास आज हो रहा,
मनुष्यता का ह्रास आज हो रहा।
धर्म-कर्म भी नहीं रहे यहाँ,
अन्धभक्ति ही पनप रही यहाँ।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें >>>



सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

No comments:
Write टिप्पणियाँ


Blog this Week