20 April, 2017

औकात की बात मत करना | ब्लॉग ऊंचाईयां


एक गाँव मे एक सेठ रहता था, उसका अपने गाँव में बड़ा ही नाम था कहते हैं, वह सेठ बहुत बड़ा दानी भी था। कोई भी शुभ दिन हो, कोई त्यौहार हो, वह सेठ गरीबों को भोजन कराता, भोजन कराने के बाद वह सेठ सबको दक्षिणा भी देता और कोई जो कुछ माँगता उसे यथासम्भव देता। सब लोग सेठ के सामने नतमस्तक होते और जय-जय हो सेठ जी की जय हो जय हो कहते।
परन्तु उनमें से एक बूढ़ा फ़कीर हाथ जोड़ कर कहता खुश रहो, सेठ जी भगवान आपको और दे।
सेठ जी काफी समय... उस बूढ़े फ़कीर की इस हरक़त से सोच में रहते कि बाकी सब लोग तो मेरे सामने नतमस्तक होते हैं और जय-जयकार बोलते हैं और ये फ़क़ीर उल्टा मुझे ही आशीर्वाद देता है, जैसे ये ही मुझे सब दे रहा हो।
एक दिन सेठ ने उस बूढ़े फ़कीर से पूछ ही लिया,एक बात बता
 प्रश्न : फ़क़ीर ? तुम्हें भोजन किसने कराया ?
उत्तर : बुढे फ़क़ीर ने कहा-- जी सेठ जी आपने ।
प्रश्न : सेठ जी ने पूछा तुम्हें पैसे किसने दिये ?
उत्तर : बूढ़े फ़क़ीर ने कहा, सेठ जी आपने।

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श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।


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