10 March, 2017

मरने के बाद भी ये लोग कई लोगों को जिंदगी दे गए और अमर हो गए | ज्ञान वर्षा


दोस्तों, आज की मेरी ये पोस्ट उन लोगों को समर्पित है जिनकी महानता और हौसले से प्रेरित होकर मैंने “हौसले को सलाम- The Real Heros” की शुरुआत की थी। और आज की इस पोस्ट में मैं उन लोगों की महानता बारे में ही बता रहा हूँ।
ये ऐसे लोग हैं, ऐसे हीरो हैं जो मरने के बाद भी अपने शरीर के अंगों को दान (organ donate) करके अमर हो गये हैं। अपने मरने के बाद इन्होने कई मरते हुए लोगों को नयी जिंदगी दी, कई लोगों की जिंदगी के अँधेरे को दूर करके उनकी जिंदगी में रौशनी भर दी है। इनके शरीर के अंग जैसे किडनी, लीवर, आँखें, दिल आदि दूसरे ऐसे लोगों के शरीर में transplant किये गए हैं जो इन अंगों के बिना मरने के कगार पर थे या उनकी जिंदगी में बिलकुल अँधेरा था। ये लोग मरने के बाद भी कई लोगों में जी रहे हैं, कई लोगों की आँखों से देख रहे हैं।
और इस महान काम के लिए इनके परिवार को दिल से सलाम (salute) । जब घर में कोई मौत होती हैं तो बहुत बड़ा ग़म, बहुत बड़ा दर्द, मिलता है, दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है, लेकिन इतने दुःख और दर्द के बावजूद इनके परिवार वालों ने इनके organ donate करने की सहमति देकर एक बड़े ह्रदय का, एक महान सोच, एक महान आत्मा का परिचय दिया है। इतना आसान नहीं होता जब घर के किसी सदस्य की लाश सामने पड़ी हो और तब उसके शरीर के अंगों को दान करने का दर्द भरा निर्णय लेना। बहुत कम लोग इतना हौसला और इतनी महानता दिखा पाते हैं। और इन परिवारों की इसी महानता की वजह से ही आज इनके अपने मरने के बाद भी अमर हो गए हैं। और बहुत से लोगों के घरों में जिंदगी लौट आई है, खुशियाँ लौट आई हैं।
मुझे ऐसे बहुत से उदाहरण मिले लेकिन मैं इस पोस्ट में कुछ के बारे में ही बताउँगा। तो आईये जानते हैं ऐसे ही महान लोगों की महानता के बारे में।
दीक्षा श्रीवास्तव–लखनऊ : मरने के बाद किया 5 लोगों की जिंदगी को रोशन
गोरखपुर की रहने वाली 22 वर्षीया दीक्षा श्रीवास्तव लखनऊ में अपने ननिहाल में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रही थी। 9 अगस्त की शाम करीब 7.30 बजे वह अपने पिता के साथ गोमतीनगर स्थित वेव मॉल के पास पैदल जा रही थी। उसी समय तेज रफ्तार से आ रही मोटरसाइकिल ने उसे तेज टक्कर मर दी। टक्कर इतनी तेज थे कि दीक्षा उछल कर दूर गिर गई और उसका सिर जमीन से तेजी से टकरा गया। टक्कर से उसके पिता अनिल श्रीवास्तव भी गंभीर रूप से घायल हो गए।  दीक्षा के सिर में गंभीर चोट आने के बाद उसे इलाज के लिए 9 अगस्त की रात करीब 9 बजे KGMU के Trauma Center लाया गया। यहां उसी दिन देर रात चोटों की सर्जरी की गई। 3 दिन तक दीक्षा का ट्रामा सेंटर में इलाज चला, लेकिन उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।  12 अगस्त की सुबह डॉक्टरों ने दीक्षा को ब्रेन डेड (Brain Dead)  घोषित कर दिया। दीक्षा के ब्रेन डेड होने के बाद उसके परिजन काफी टूट गए। ब्रेन डेड मरीज के बारे में दीक्षा के परिजनों को KGMU के कांउसलरों ने समझाने की कोशिश की और दीक्षा के अंगों को दान करने की गुजारिश की।
दीक्षा के पिता मेडिकल पेशे से जुड़े हैं इसीलिए उन्होंने दीक्षा के अंग दान (organ donate) करने की सहमति दे दी। परिवार की सहमति से दीक्षा के अंग जैसे दिल, लीवर, किडनी, आँखें आदि दूसरे ज़रूरत मंद लोगों को transplant के लिए अस्पतालों को भेजे गए। अब इनके दान किये गए अंग 5 लोगों को transplant किये जायेंगे जिनसे उनकी जिंदगी में नयी रौशनी लौट आई है। मरने के बाद भी ये लड़की 5 लोगों की जिंदगी को रोशन कर गयी।

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पुष्पेन्द्र कुमार सिंह जी ग्रेटर नोएडा से है और लगभग दो वर्षो से ब्लॉग दुनिया में सक्रिय है। जो ज्ञान वर्षा ब्लॉग का संचालन कर रहे है। ज्ञान वर्षा ब्लॉग पर आप बेहतरीन माेटिवेशनल लेख पढ़ सकते है। ब्लॉगर से ई-मेल gyanversha1@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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