11 December, 2016

आपकी सहेली | हम भगवान के साथ इतनी नाइंसाफी क्यों करते है?


शीर्षक पढ़कर चौंक गए न? भगवान के साथ नाइंसाफी और वो भी हमारे द्वारा? संभव ही नहीं है!! भई, नाइंसाफी तो बड़ा व्यक्ति छोटे व्यक्ति पर, बलशाली निर्बल पर करता है। हम अदने से इंसान उस सर्वशक्तिमान से नाइंसाफी कैसे कर सकते है? आप सही कह रहें है। लेकिन ये लेख पूरा पढ़ने के बाद मुझे पूरा विश्वास है कि आप भी मेरी बात से सहमत अवश्य होंगे कि जानते-समझते हुए भी हम उस परमपिता के साथ कितनी नाइंसाफी करते है।
हमारे यहां आज भी ज्यादातर घरों में भगवान को भोग लगाए बिना भोजन में जुठ नहीं डालते। मतलब भगवान को भोग लगाए बिना घर का कोई भी सदस्य उस भोजन को ग्रहण नहीं करता। यहां तक कि व्यंजन बनाने के बाद, यह देखने के लिए कि वो अच्छा बना कि नहीं, उसको चखते भी नहीं! ठीक है…. हम हमारे इष्टदेव को हमारा जूठा थोड़े ही खिलाएंगे? लेकिन जरा सोचिए, भगवान को भोग लगाकर हम खाना खाने बैठे। पहला कौर मुंह में डाला...अरे... तुरई या लौकी की सब्जी बनाई थी और वो कडू निकल गई। क्या वो कडू सब्जी हम खाएंगे? नहीं न... क्यों? हमने हमारे इष्टदेव परमपिता भगवान को तो वो कडू सब्जी खिलाई है। जब हमारे भगवान वो कडू सब्जी खा सकते है, तो कायदे से हमें भी भगवान का प्रसाद समझकर ही सहीं, वो कडू सब्जी खानी चाहिए... क्यों नहीं खाते हम वो कडू सब्जी? क्या हमें कभी भी इस बात का थोड़ा सा भी अफसोस होता है कि हमने भगवान को कडू सब्जी खिलाई? क्या हम घर के किसी भी सदस्य को वो कडू सब्जी खिलाएंगे? फिर हमने भगवान को क्यों खिलाई? क्या भगवान के साथ ये बहुत बड़ी नाइंसाफी नहीं है?
कभी-कभी ऐसा होता है कि हमने जो सब्जी बनाई, उसमें नमक डालना ही भुल गए या नमक बहुत ज्यादा हो गया, ऐसे में जब हम भगवान को भोग लगाते है तो उन बेचारे भगवान को तो बिना नमक की या ज्यादा नमक की सब्जी ही खानी पड़ती है न! मजे की बात यह है कि जब हम खूद वह सब्जी खाते है तो हम बिना नमक की या ज्यादा नमक की सब्जी नहीं खाते। हम उस सब्जी को हमारे हिसाब से सुधार कर खाते है। फिर भगवान ने हमारा क्या बिगाड़ा है? ऐसा ही वाक़या मिठाई के साथ भी होता है। क्यों करते है हम उनके साथ यह नाइंसाफी? वो पलटकर हमें कुछ बोलता नहीं इसलिए या भगवान को कडू से कडू सब्जी भी चलती है इसलिए। या फिर भगवान को किसी भी चीज का स्वाद ही पता नहीं चलता इसलिए।


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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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