31 December, 2016

Pramod Joshi - Best Blogger of the Month for December 2016


इस माह आपको 'बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द मंथ' कॉलम में हम आपको ऐसे ब्लॉगर से मुलाकात कराने जा रहे है जो एक वरिष्ठ पत्रकार भी है और कार्टूनिस्ट भी है। इस माह के बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द मंथ गाजियाबाद के प्रमोद जोशी जी है। प्रमोद जी जिज्ञासा नामक ब्लॉग लिखते है और 22 दिसम्बर 2004 को ब्लॉग दुनिया में 'The beginning' शीर्षक के साथ एंट्री की थी, लेकिन यह पोस्ट मात्र एक सूचना थी कि मै अभी नया हूं और कुछ समय बाद अपने विचारों को पोस्ट करूंगा। उसके बाद लगता है कि जैसे एक वर्ष के लिए प्रमोद जी अपने ब्लॉग को भूल गये और फिर 15-16 दिसम्बर, 2005 को पुन: एक-एक लेख प्रकाशित किया, जोकि अंग्रेजी में थे। वहीं, लगभग दो वर्ष बाद उन्होने 20 अप्रैल, 2007 को 'पुनरारम्भ' शीर्षक के साथ एक लाईन की पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होने लिखा कि काफी समय पहले मैने यह ब्लाग बनाया था, पर इसे लिखने की कला नहीं सीखी थी। अब मैं इसे नियमित रूप से लिखने का प्रयास करूंगा। उसके बाद प्रमोद जी 30 मार्च, 2010 को एक पोस्ट आईपीएल पर लिखी और यहीं से उन्होने ब्लॉग दुनिया में अपना वास्तविक कदम रखा। 2010 से अब तक उन्होने लगभग एक हजार से अधिक पोस्ट लिख चुके है।

प्रमोद जी के 'जिज्ञासा' ब्लॉग को पढ़े!

इसके अलावा, प्रमोद जी 'ज्ञानकोश' नाम से भी एक अन्य ब्लॉग का संचालन कर रहे है, जिसे उन्होने 20 मार्च, 2011 को शुरू किया था। यहां पर आपको देश-विदेश की ज्ञान-विज्ञान की बाते, रोचक जानकारियां और भी बहुत कुछ। हमारा दावा है कि यह ब्लॉग हर वर्ग के विद्यार्थियो के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो सकता है, क्योंकि यहां पर विश्व की प्रमुख घटनाएं, सामान्य जानकारी, विज्ञान, कम्प्यूटर, समाज और कानूनी ज्ञान से संबधित जानकारियों का भंडार है। लेखक प्रमोद जी के अनुसार, यह ब्लॉग जीवन की बुनियादी जानकारी से जुड़ा है। पिछले कई वर्षो से मैं मासिक पत्रिका कादम्बिनी में ज्ञानकोश नाम से एक कॉलम लिखता हूं। यह कॉलम इस पत्रिका के एक पुराने कॉलम गोष्ठी का संवर्धित रूप है। हाल ही में राजस्थान पत्रिका के मी नेक्स्ट सप्लीमेंट में Knowledge Corner नाम से एक और कॉलम शुरू किया है। अपने इस ब्लॉग में मैं इन कॉलमों में प्रकाशित सामग्री को रखूँगा। इसके अलावा भी कुछ और जानकारी-परक सामग्री दूँगा।

प्रमोद जी के 'ज्ञानकोश' ब्लॉग को पढ़े!

लखनऊ के मूल निवासी प्रमोद जी का जन्म 23 जून, 1952 को हुआ है और वर्तमान में गाजियाबाद में रह रहे है। 1973 में उन्होने एमए परीक्षा पास की। प्रमोद जी लगभग चालीस वर्षो से पत्रकारिता से जुड़े हुए है और स्वतंत्र भारत, नवभारत टाईम्स, सहारा टीवी, हिन्दुस्तान जैसे समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दी है। उन्होने 1970 के आसपास कार्टून बनाने शुरू किए, जो लखनऊ के समाचा पत्र 'स्वतंत्र भारत' में छपे। उसी दौरान उनका पहला लेख '18 वर्षीय मताधिकार' भी स्वतंत्र भारत के सम्पादकीय पेज प्रकाशित हुआ था। उन दिनों मताधिकार की उम्र 18 साल करने की बहस चल रही थी। प्रमोद जी के अनुसार, इस लेख के लिए मैने कई दिन ब्रिटिश काउंसिल लाइब्रेरी में बैठकर सामग्री जुटाई कि किस-किस देश में 18 साल के लोगों को वोट देने का अधिकार है। पढ़ते-पढ़ते मुझे जानकारी मिली कि स्विट्ज़रलैंड में तो महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार उसी साल 1971 में मिला। विश्वविद्यालय की पढ़ाई के मुकाबले इस किस्म की पढ़ाई मुझे रोचक लगी। उन दिनों मेरा पूरा दिन ब्रिटिश काउंसिल लाइब्रेरी या अमेरिकन लाइब्रेरी, अमीरुद्दौला लाइब्रेरी, नरेन्द्रदेव लाइब्रेरी और अमीनाबाद की गंगा प्रसाद वर्मा लाइब्रेरी में बीत जाता था। राजनाति शास्त्र विभाग में एमए की एक या दो क्लास सुबह निपटाने के बाद दिनभर खाली मिलता था।
पत्रकारिता में करियर पर उन्होने अपने ब्लॉग 'जिज्ञासा' में मेरा पन्ना में लिखा है कि लखनऊ विश्वविद्यालय में मुझे पत्रकार बनने का माहौल मिला और प्रेरणा मिली। संयोग से मैने अपनी बीए की पढ़ाई के दौरान कार्टून बनाने की कला सीख ली थी। मेरे कार्टून लखनऊ के स्वतंत्र भारत में छपे भी थे। मैं वहाँ किसी को जानता नहीं था। बस डाक से भेज दिए और छप गए। उसके बाद मुझे हर वहाँ से कभी सात रुपए 40 पैसे का कभी नौ रुपए 90 पैसे का मनीऑर्डर आने लगा। बाद में जब मैं स्वतंत्र भारत के सम्पादकीय विभाग में शामिल हुआ तब अशोक जी ने उन लेखकों के मानदेय में मनीऑर्डर की राशि भी जुड़वानी शुरू की जो दफ्तर आकर पेमेंट नहीं लेते थे। उसे हम पेमेंट के नाम से ही जानते थे।
उन्होने लिखा है कि उस ज़माने में खबरें लिखने में तटस्थता बरतने पर ज़ोर दिया जाता था। शीर्षक लिखने में अपना मत आरोपित करने से बचने पर ज़ोर भी होता था। सीनियर लोग नए साथियों को घंटों समझाते थे। सम्पादकीय विभाग में आने के बाद मैने जीवन में पहली बार अजब फक्कड़, अलमस्त और मनमौजी लोग देखे। उनमें रमेश जोशी भी एक थे। स्वतंत्र भारत में ही नहीं पायनियर में भी। बाद में मैने पी थेरियन की किताब 'गुड न्यूज़, बैड न्यूज़' पढ़ी तो वे अनेक नाम याद आए जिनके करीब से मैं गुज़र चुका हूँ।
प्रमोद जी के अनुभवों और कार्यक्षेत्र को जानकर आप समझ सकते है कि एक पत्रकार अपने ब्लॉग पर क्या लिख सकता है। जी हाँ! सही पकड़े है, लेकिन आपको उनके ब्लॉग पर घटनाचक्र, मीडिया, नवोन्मेष, कुछ अटपटा-चटपटा, सामाजिक और सामयिक घटनाओं पर विशेष आलेख पढ़ने को मिलेगें।
वर्तमान में प्रमोद जी, स्वतंत्र लेखक के रूप में कार्य कर रहे है। इसके साथ ही जन संदेश टाईम्स, जनवाणी, राजस्थान पत्रिका, कादम्बिनी के लिए नियमित रूप से लेखन कर रहे है। प्रमोद जी से ई-मेल pjoshi23@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है और उन्हे फेसबुक पर फॉलो करें।

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