03 October, 2016

Blog of the Week - Uchaiyaan | ऊंचाईयां


इस सप्ताह ब्लॉग ऑफ द वीक के लिए ब्लॉग ‘ऊंचाईयां’ का चयन किया गया है। इस ब्लॉग की संचालिका रितु आसूजा जी है जो कि ऋषिकेश से है। रितु जी ने ब्लॉग जगत में 21 जुलाई, 2013 में एंट्री की और अब उनके ब्लॉग की पोस्ट सेन्चुरी की ओर अग्रसर है। ब्लॉगर रितु आसूजा जी के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़े।
ब्लॉग को लिखने के पीछे हर ब्लॉगर या लेखक का एक मकसद होता है। हमने रितु जी से उनके ब्लॉग का मकसद जानना चाहा तो उन्होने हमें बताया कि जिस तरह समुंदर में लहरों का आना जाना लगा रहता है। इसी तरह हमारे मन भी विचारो का द्वन्द उथल-पुथल करता रहता है, अपने विचारों को सही दिशा देकर जिससे कहीं किसी एक का भी मार्गदर्शन होता है तो मेरे लिखने का उद्देश्य सफल है।

ब्लॉग ‘ऊंचाईयां’ की कुछ उपलब्धियां

ब्लॉग 'ऊंचाईयां' की लेखिका रितु आसूज जी ब्लॉग के लिए लेखन आत्मसंतुष्टि और समाज को राह दिखाने के उद्देश्य से करती है, जैसा कि हमने उनके ब्लॉग का अवलोकन किया। उनके ब्लॉग पर कमेंट की कोई बाढ़ या तारीफों के कोई कसीदे नही गढ़े गये है, लेकिन फिर भी उन्होने अपने ब्लॉगिंग के सफर को बीच में कहीं नही छोड़ा और लगातार लेखन करती रही है। जिसके लिए हमने उन्हे ब्लॉग ऑफ द वीक के लिए भी चुना।
यहां पर ब्लॉग पर आपको प्रेरक और सरल शब्दों में लिखी हुई कविताएं ज्यादा पढ़ने को मिलेगी, उन्होने 13 जुलाई, 2014 को लिखी एक पोस्ट 'जूनून' में कविता के माध्यम से कविता को परिभाषित करने के साथ हौसले और जूनूनी लोगो के प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की है, जिससे निराश व हताश को भी प्रेरणा मिल सकती है। आप भी यहां पर कुछ लाईने पढ़ सकते है-

जो दिल से निकलती है 
वही सच्ची कविता होती है
दिल में जो आग है, तूफ़ान है 
कुछ कर गुजरने का जनून है, 
ऐसे लोगो को कहाँ सुकून है।

पूरी रचना पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

इसके अलावा इस ब्लॉग पर रितु जी ने विभिन्न हिन्दू त्यौहारों की महिमा का बखान आम जनमानस में प्रचलित शब्दों का प्रयोग करते हुए किया है। जिन्हे आम पाठक भी आसानी से समझ सकता है। 
वहीं, रितु जी ने अपने ब्लॉग में अपने अनुभवों को भी साझा किया है, जो पाठकों के लिए प्रेरक हो सकते है, उन्होने अपने अनुभवों को छोटे-छोटे प्रसंगो के रूप में पिरोकर उन्हे सुपाठ्य कर पाठको के लिए प्रस्तुत किया है। इस पोस्ट को पढ़कर आप समझ सकते है कि उनके दिल में असहाय लोगो के लिए भी असीम पीड़ा और सहायता करने का जज्बा भी कम नही है। जिसकी बानगी आप 26 जून, 2015 को प्रकाशित ‘परियों वाली आंटी’ पोस्ट में पढ़ सकते है।
उस नन्हें बच्चे कि रोने कि आवाज़ें मानो कानोँ को चीर रही थीं। दिल में एक गहरी चोट कर रही थी। बहुत सोचा दिल नहीं माना। मैंने आखि़र दरवाजा खोलकर देख ही लिया।
देखा तो दिल पहले से भी अधिक दुःखी हो गया, पांच साल कि नन्ही बच्ची दो साल के अपने छोटे भाई को लिये घर के बाहर बैठे थी और अपने भाई को संभाल रही थीं। कई तरह के यत्न कर रही थी कि उसका भाई किसी तरह रोना बन्द कर दे। पर शायद वो भूखा था। वो बहन जो स्वयं की देख-रेख भी ढंग से नही कर सकती थी वह बहन अपने भाई को बड़े यत्न से संभाल रही थी। बहन का फर्ज निभा रही थी।
बहुत पीड़ा हो रही थी उन बच्चों को देखकर, शायद पेट कि क्षुधा को शान्त करने के लिये वह लड़की अपने भाई को लेकर कभी किसी के घर के आगे बैठती कभी किसी के..... शायद कहीं से कुछ को खाने को मिल जाए। आखिर मेरे मन कि ममता ने मुझे धिक्करा मै जल्दी से उन बच्चों के खाने के लिये कुछ ले आई, लड़की ने तो झट से रोटी और सब्जी खा ली, परंतु भाई अभी भी रो रहा था, वह छोटा था, मैने उसके भाई के लिये कुछ बिस्किट खाने को दिये फ़िर जाकर वह बच्चा शान्त हुआ।

पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

इसके साथ ही उन्होने अपने ब्लॉग में बच्चों के लिए प्रेरक कविताएं, प्रसंग और मोटिवेशनल लेखों को भी शामिल किया है। जिन्हे पढ़कर वास्तव में ही निराशा में भी आशा मिल सकती है। हमने उनके ब्लॉग का अवलोकन करने पर लगा कि वास्तव में ‘ऊंचाईयां’ ब्लॉग अपने नाम के अनुसार ही पाठकों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा रहा है। बाकी पाठकों के ऊपर निर्भर करता है कि वो इस ब्लॉग को क्या रैंक देते है।
जुड़े रहे हमारे साथ, अब हम आपके सामने अगले सप्ताह नये ब्लॉग की चर्चा के साथ प्रस्तुत होंगे।

No comments:
Write टिप्पणियाँ


Blog this Week