30 September, 2016

एक हादसे से 'पीयूष गोयल' को मिला कुछ अलग करने का जज्बा

मिरर इमेज लिखने के जूनून लिख डाली विश्व प्रसिद्ध पुस्तकें


हमारे देश में एक से बढ़कर एक प्रतिभाएं मौजूद है जिनकी प्रतिभा लोगो को दॉतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर देती है। ऐसी ही एक प्रतिभा है दादरी के पीयूष गोयल, जिन्होने ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि देखने वालों आँखें खुली रह जाए। पियूष ने पांच तरह की पुस्तकों को उल्टे अक्षरों में गीता, सुई से मधुशाला, मेंहंदी से गीतांजलि, कार्बन पेपर से पंचतंत्र के साथ ही कील से पीयूष वाणी लिख डाली। इनमें अध्यात्म दर्शन और कर्मफल संस्कृति को व्यापक और सहजता के साथ जनग्राही बनाने वाली भागवत गीता भी शामिल है। 49 वर्षीय पीयूष गोयल कुछ अलग करने की धुन में ऐसे जुटे कि शब्दों को उल्टा लिखने में लग गए। इस धुन में ऐसे रमे कि उन्होने कई अलग-अलग सामग्री से कई पुस्तकें लिख दी।

नर न निराश करो मन को,
नर न निराश करो मन को।
कुछ काम करो, कुछ काम करो,
जग में रहकर कुछ नाम करो।

इन लाइनों से प्रेरणा लेकर पले-बढे पीयूष गोयल का 2000 उनका एक्सीडेंट हो गया था। उन्हें इस हादसे से उबरने में करीब नौ माह लग गए। इस दौरान उन्होंने श्रीमद्भभागवद गीता को अपने जीवन में उतार लिया। जब वे ठीक हुए तो कुछ अलग करने की जिजीविषा पाले वे शब्दों को उल्टा (मिरर शैली) लिखने का प्रयास करने लगे। फिर अभ्यास ऐसा बना कि उन्होंने कई किताबें लिख दीं। गोयल की लिखीं पुस्तकें पढ़ने के लिए आपको दर्पण का सहारा लेना पड़ेगा। उल्टे लिखे अक्षर दर्पण में सीधे दिखाई देंगे और जिन्हे आप आसानी से उसे पढ़ लेंगे।
पीयूष गोयल बताते हैं कि कुछ लोगों ने कहा कि आपकी लिखी किताबें पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत होगी। कुछ ऐसा करें कि दर्पण की जरूरत न पड़े। इसे ध्यान में रखते हुए पीयूष गोयल ने सुई से मधुशाला लिख दी। हरिवंश राय बच्चन की पुस्तक ‘मधुशाला’ को सुई से मिरर इमेज में लिखने में करीब ढाई माह का समय लगा। गोयल की मानें तो यह सुई से लिखी ‘मधुशाला’ दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सुई से लिखी गई है। आईये! एक नजर डालते है उनकी अदभुत कृतियों पर...

उल्टे अक्षरों से लिखी गई 'भागवत गीता'


उल्टे अक्षरो में लिखी भागवत गीता को आप देखेंगे तो एकबारगी भौचक्के रह जायेंगे, लेकिन आपको समझ में नहीं आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है। पर आप जैसे ही दर्पण (शीशे) के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी। सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे। मिलनसार पीयूष मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं।

सुई से लिखी 'मधुशाला'


पीयूष ने बताया कि अक्सर मुझसे ये पूछा जाता था कि आपकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत पड़ती है। पढ़ना उसके साथ शीशा, आखिर बहुत सोच समझने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यों न सूई से कुछ लिखा जाये सो मैंने सूई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘मधुशाला’ को लिख डाला, जिसे करीब 2 से ढाई महीने में पूरा किया। यह पुस्तक भी मिरर इमेज में लिखी गयी है और इसको पढ़ने लिए शीशे की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि रिवर्स में पेज पर शब्दों के इतने प्यारे मोतियों जैसे पृष्ठों को गुंथा गया है, जिसको पढ़ने में आसानी रहती हैं और यह सूई से लिखी ‘मधुशाला’ दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सूई से लिखी गई है।

मेंहदी कोन से लिखी गई 'गीतांजलि' 


पीयूष गोयल ने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ को ‘मेंहदी के कोन’ से भी लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू की और सभी 103 अध्याय 5 अगस्त 2012 को पूरे कर दिए। इसको लिखने में 17 कोन तथा दो नोट बुक प्रयोग में आई हैं। पीयूष ने श्री दुर्गा सप्त शती, अवधी में सुन्दरकांड, आरती संग्रह, हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में श्री साईं सत्चरित्र भी लिख चुके हैं। ‘रामचरितमानस’ (दोहे, सोरठा और चौपाई) को भी लिख चुके हैं।

कील से लिखी ‘पीयूष वाणी’  


अब पीयूष ने अपनी ही लिखी पुस्तक ‘पीयूष वाणी’ को कील से ए-4 साइज की एल्युमिनियम शीट पर लिखा है। पीयूष ने बताया कि वे इससे पहले दुनिया की पहली सुई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘मधुशाला’ को लिख चुके हैं। तो उन्हें विचार आया कि क्यों न कील से भी प्रयास किया जाये सो उन्होंने ए-फोर साइज के एल्युमिनियम शीट पर भी लिखा।

कार्बन पेपर की मदद से लिखी ‘पंचतंत्र’


गहन अध्ययन के बाद पीयूष ने कार्बन पेपर की सहायता से आचार्य विष्णुशर्मा द्वारा लिखी ‘पंचतंत्र’ के सभी ( पाँच तंत्र, 41 कथा) को लिखा है। पीयूष ने कार्बन पेपर को (जिस पर लिखना है) के नीचे उल्टा करके लिखा जिससे पेपर के दूसरी और शब्द सीधे दिखाई देंगे यानी पेज के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में और दूसरी तरफ सीधे दिखाई पड़ते है।


About Piyush Goel
Parents
Father - Mr. Devendra Kumar Goel and Mother - Smt. Ravikanta
Date of Birth
10 February, 1967
Birth Place
Dadri, India
Qualification
Diploma in Mechanical Engineering
Profession
Mechanical Engineer in a Multinational Company
Achievements
दुनिया की पहली मिरर इमेज पुस्तक श्रीमदभागवत गीता के रचनाकार हैं। सभी 18 अध्याय 700 श्लोक अनुवाद सहित हिंदी व अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लिखा है। दुनिया की पहली सुई से मधुशाला भी लिखी है। 3 पुस्तकें भी प्रकशित। इस के आलावा संस्कृत में श्री दुर्गा सत्सती, अवधी में सुन्दरकाण्ड, हिंदी व अंग्रेज़ी में श्रीसाईं चरित्र, श्री चालीसा संग्रह, मेहंदी से गीतांजलि (रबींद्रनाथ टैगोर कृत), कील से ‘पियूष वाणी’ एवं कार्बन पेपर से ‘पंचतंत्र’ (विष्णु शर्मा कृत) भी लिख चुके हैं
Hobbies
पीयूष गोयल संग्रह के भी शौक़ीन हैं, उनके पास प्रथम दिवश आवरण, पेन संग्रह, विश्व प्रसिद्ध लोगो के ऑटोग्राफ़ संग्रह भी हैं।

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