19 September, 2016

Blogger 'Reena Maurya' Became a part of iBlogger

ब्लॉगरों का आई-ब्लॉगर से जुड़ने का सिलसिला जारी है और इसी कड़ी में आज आई-ब्लॉगर के साथ रीना मोर्या जी जुड़ी है जो एक अध्यापिका है और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ज्ञान बांट रही है। रीना जी मुम्बई से है और सन् जुलाई, 2011 से ब्लॉग ‘मेरा मन पंछी सा’ का संचालन और इसके लिए लिख रही है। उन्होने अबतक लगभग डेढ़ सौ रचनाएं ब्लॉग के लिए लिखी है। उन्होने अपनी रचनाओं में घरेलू व सामाजिक और प्रकृति को स्थान दिया है और उन्हे कविताओं के रूप संजोया है। उन्होने कई कविताओं में रिश्तों और प्रेम की परिभाषा को लाजवाब शब्दों में पिरोकर पेश किया है। कुल मिलाकर कह सकते है कि राीना जी का कविताओं के लिए शब्दों का संयोजन काफी बेहतर है। पढ़े! उनके ब्लॉग से ली गई एक पोस्ट...

वो जन्म से वैश्या नहीं

वो जन्म से वैश्या नहीं
ना किया है उसने कोई पाप
घरवालों के भविष्य की खातिर
झेल रही संताप
बाबा उसका एकदम शराबी
माँ के ह्रदय में है खराबी
छोटे छोटे भाई - बहनों की
खातिर उसने घुँघरी पहने
अपनी अस्मत हर रात गंवाती 
फिर भी दिनभर मुस्काती
उस बेटी के हिम्मत के क्या कहने
दिन में माँ - बाबा की बिटिया है
भाई- बहनों की दीदी
रात में बन जाती है वो
लाली और सुरीली
जीवन उसका जैसे अभिशाप
नहीं बचा पाई वो बिटिया
खुद को करने से ये पाप
फिर भी आस है उसके मन में
की एकदिन उसके भाई- बहन
समझेंगे उसके त्याग,पीड़ा और जज्बात
और दिलाएंगे उसको 
इस दलदल से निजात
जीती है लेकर बस यही आस
और बेचती है अपना जिस्म हर रात।

<<< ‘मेरा मन पंछी सा’ ब्लॉग की अन्य रचनाएं पढ़े >>>



रीना मौर्या जी की रचनाओं को कई प्रतिष्ठित वेब पत्रिकाओं, समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं ने स्थान दिया है। इसी के साथ आप एक कलाकार भी है उनके ब्लॉग पर उनके द्वारा बनाए गये चित्र देखे जा सकते है। आपसे ई-मेल mauryareena72@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है और Facebook पर भी जुड़ सकते है।


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