15 August, 2016

असली स्वतंत्रता दिवस - Poem


आज स्वतंत्रता दिवस है, पर,
दिल यह कहने को विवश है,
क्या यहाँ है सच्ची स्वतंत्रता?
हर पथ पर है बस परतंत्रता...

जन गण मन अधिनायक जय,
शायद यह है भी, या नहीं है?
परन्तु क्या 70 वर्षों बाद भी,
अपने देश की जय है? नहीं है...

बरसों बाद भी हर एक शख़्स,
परेशानियों से लड़ रहा है,
झूठी सामाजिक अराजकता से,
चुपचाप नाक़ाम भिड़ रहा है...

यहाँ की व्यवस्था बड़ी निराली है,
जो करती चाटुकारों की रखवाली है, 
जो आँखों के रहते हुए भी अंधे हैं,
कान-ज़बां रखकर भी गूंगे-बहरे हैं...

विकास तो बख़ूबी हो रहा है,
पर मज़े उसके कौन ले रहा है?
और यदि नहीं हो रहा है, तो,
कौनसा कोई ज़िम्मेदारी ले रहा है...

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तुषार रस्तोगी जी 2010 से ‘तमाशा-ए-जिन्दगी’ ब्लॉग का संचालन एवं लेखन कर रहे है। तुषार जी अब तक 300 से अधिक रचना पोस्ट लिख चुके है। आप अधिकतर कविताओ का लेखन करते है और विविध विषयों को अपनी रचनाओं को शामिल करते है। आपको फेसबुक पर Follow करें।

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