13 August, 2016

स्वयंभू गोरक्षकों के नाम एक खुली चिट्ठी

गुंडागर्दी की बजाय कभी इन सवालों का जवाब तलाशा है?


- फरहान रहमान

प्रिय गौरक्षक,
जानता हूं 2014 में केंद्र में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद आपमें नई ऊर्जा का संचार हुआ है। आप अपनी धार्मिक भावनाओं का सदियों से अनादर करते आए लोगों और पूर्व में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के वजह से आपकी गौ माता की हत्या करते चले आ रहे उन सभी लोगों से बदला लेना चाहते हैं, ताकि उनको सबक सिखाया जा सके और वे भविष्य में ऐसा करने से पहले सोचें। मेरा आपको पत्र लिखने का मकसद आपको नसीहत देना या फिर आपके काम को सही या गलत ठहराना कतई नहीं है। न ही मैं आपकी पार्टी की दोहरी नीति को सामने लाना चाहता हूं। जो सत्ता में आयी तो थी गुलाबी क्रान्ति को खत्म करने का नारा लगाकर, लेकिन पिछले दो सालों में इसने भारत को विश्व का नंबर 1 बीफ निर्यातक देश बना दिया है।
बधाई हो, आपको अपनी पार्टी की इस उपलब्धि पर, आखिर देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है। यह पत्र मैं आपको अपनी तरह का एक आम आदमी मानकर लिख रहा हूं, जो भोला है, सीधा-सादा है और परिस्थितियों का मारा है। मेरे खत में कुछ सवाल हैं, जिनका जवाब आपको मुझे नहीं, बल्कि खुद को देना है। उम्मीद है, इन सवालों के जरिए आप अपने सवालों के जवाब भी खोज लेंगे। जिनके ना होने की वजह से आपके काम और तर्क पर जोश हावी है और इसकी वजह से ही राजनीतिक दल आपका गलत इस्तेमाल करने में कामयाब हो जाते हैं।
शुरुआत करते हैं आपकी दिनचर्या से। जब आप सुबह उठते हैं, तो क्या आपने कभी पक्का किया कि जिस टूथपेस्ट से आप अपने दिन की शुरुआत कर रहे हैं, वह गाय की चर्बी से तो नहीं बना? टूथपेस्ट बनाने में ग्लिसरीन का इस्तेमाल होता है, इसे वनस्पति (सोयाबीन एवं पाम) तथा गोजातीय वसा दोनों से बनाया जा सकता है। वनस्पति से ग्लिसरीन को बनाना महंगा पड़ता है। भला बहुराष्‍ट्रीय कंपनियां आपकी धार्मिक आस्था के लिए अपने फायदे से समझौता क्‍यों करेंगी? गोजातीय वसा का इस्तेमाल सिर्फ टूथपेस्ट में नहीं होता, बल्कि आपके कॉस्मेटिक, माउथवॉश, च्विंग गम, साबुन, शैम्पू, शेविंग क्रीम, कंडीशनर, मॉइस्चराइजर, बालों में लगाने वाली क्रीम जैसे कई प्रोडक्ट्स में होता है। इन उत्पादों के पैक में लिखे पंथेनोल, एमिनो एसिड, विटामिन बी सभी को गोजातीय वसा से बनाया जाता है। क्या आपने चेक किया इन चीजों को?
अगर मुंह धो लिया हो, तो चलिए चाय पीते हैं। चीनी कितनी लेंगे? एक चम्मच या दो चम्मच? रुकिए। क्या आपको मालूम है कि चीनी की सफेदी कैसे आती है? इसे जानवरों की हड्डियों के चूरे से साफ किया जाता है, तब जाकर यह सफेद होती है। क्या आप पक्का कह सकते हैं कि आपकी चीनी को गाय की हड्डियों के चूरे से साफ नहीं किया गया होगा?
चलिए, चाय छोड़ देते हैं और नाश्ता करते हैं। क्या लेंगे? पूरी-छोले या सब्जी पराठा? लेकिन पहले पक्का कीजिये कि जो रिफाइंड तेल का इस्तेमाल आप कर रहे हैं उसमें गोजातीय वसा तो नहीं? आपकी जानकारी के लिए 1983 में जब इंदिरा गांधी की सरकार थी, तो यह खुलासा हुआ था कि वनस्पती कंपनियां अपने खाद्य तेल में गोजातीय चर्बी का इस्तेमाल कर रही हैं। बड़ा हंगामा हुआ था जिसका नेतृत्व आपके पूर्व लीडर अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण अडवाणी ने किया था। विपक्ष के दबाव में इंदिरा गांधी ने कई कंपनियों के मालिकों को जेल भेजा और गोजातीय वसा के खाद्य तेल में इस्तेमाल पर पाबन्दी लगा दी। आपको पता है कि दिसम्बर 2015 में आपकी पार्टी की सरकार ने इस 32 साल पुराने बैन/पाबन्दी को चुपचाप हटा लिया? क्या अब आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके घर में इस्तेमाल हो रहे अडानी के तेल में गोजातीय वसा नहीं होगा?

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