02 November, 2015

भूकंप आने की प्रक्रिया

जापान के भयंकर भूकंप को एक साल पूरा हो रहा है । यह दुनिया में अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप के रूप में दर्ज है, जबसे हम भूकम्पों की तीव्रता का आकलन कर के उसे दर्ज करने लगे हैं । न सिर्फ भूकंप, किन्तु उसके कारण आई सुनामी ने जापान को बुरी तरह से प्रभावित किया , और फिर न्यूक्लियर पावर रिएक्टर में भी कण्ट्रोल फेल हुए – जिससे स्थिति और भी बिगड़ गयी । भूकंप आते क्यों हैं ? इनके पीछे कौन से प्राकृतिक तंत्र काम करते हैं ? सुनामी कैसे आती है ? “न्यूक्लियर मेल्ट डाउन ” क्या होता है ? इन सब पर एक नज़र डालते हैं ।
सबसे पहले ( इस भाग में ) भूकंप आने की प्रक्रिया देखते हैं ।

हम सब जानते हैं  कि धरती के भीतर इतनी गर्मी है की वहां कुछ भी ठोस नहीं है । पिघला हुआ शैल्भूत (magma ) हमेशा उबलता रहता है । विज्ञान की theories के अनुसार माना जाता है  कि पहले धरती शायद सूर्य से फिंका हुआ एक जलता पुंज थी जो किसी तरह एक कक्षा में स्थापित हो कर सूर्य की परिक्रमा करने लगी और करोड़ों वर्षो तक घूमते हुए ठंडी होती होती तरल रूप में आई । {आप जानते होंगे कि satellites कैसे भेजे जाते हैं – कि पहले rocket  धरती से “फेंका” जाता है । उसकी शुरूआती गति के अनुसार वह उतने radius (त्रिज्या) की कक्षा में स्थापित हो जाताहै । }फिर जिस तरह उबले दूध पर ऊपरी सतह पर ठंडी होने से मलाई पड़ने लगती है, उसी तरह इस पिघले शैल्भूत पर भी ऊपर “मलाई” सी पड़ने लगी, अर्थात ऊपर की सतह ठोस होने लगी । परन्तु यदि आपने कभी दूध उबाला है, तो आप जानते होंगे कि यह मलाई एक अभंग इकाई (unbroken entity ) नहीं होती, बल्कि अलग अलग मलाई के भाग होते हैं, जिनके बीच में दरारें होती हैं । ( नहीं देखा, तो आज देखिएगा – चाय या दूध उबलने के बाद उसे दो मिनट ठंडा होने दीजियेगा, फिर ध्यान से मलाई को देखिएगा ।)

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