September 30, 2016


एक हादसे से 'पीयूष गोयल' को मिला कुछ अलग करने का जज्बा

मिरर इमेज लिखने के जूनून लिख डाली विश्व प्रसिद्ध पुस्तकें


हमारे देश में एक से बढ़कर एक प्रतिभाएं मौजूद है जिनकी प्रतिभा लोगो को दॉतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर देती है। ऐसी ही एक प्रतिभा है दादरी के पीयूष गोयल, जिन्होने ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि देखने वालों आँखें खुली रह जाए। पियूष ने पांच तरह की पुस्तकों को उल्टे अक्षरों में गीता, सुई से मधुशाला, मेंहंदी से गीतांजलि, कार्बन पेपर से पंचतंत्र के साथ ही कील से पीयूष वाणी लिख डाली। इनमें अध्यात्म दर्शन और कर्मफल संस्कृति को व्यापक और सहजता के साथ जनग्राही बनाने वाली भागवत गीता भी शामिल है। 49 वर्षीय पीयूष गोयल कुछ अलग करने की धुन में ऐसे जुटे कि शब्दों को उल्टा लिखने में लग गए। इस धुन में ऐसे रमे कि उन्होने कई अलग-अलग सामग्री से कई पुस्तकें लिख दी।

नर न निराश करो मन को,
नर न निराश करो मन को।
कुछ काम करो, कुछ काम करो,
जग में रहकर कुछ नाम करो।

इन लाइनों से प्रेरणा लेकर पले-बढे पीयूष गोयल का 2000 उनका एक्सीडेंट हो गया था। उन्हें इस हादसे से उबरने में करीब नौ माह लग गए। इस दौरान उन्होंने श्रीमद्भभागवद गीता को अपने जीवन में उतार लिया। जब वे ठीक हुए तो कुछ अलग करने की जिजीविषा पाले वे शब्दों को उल्टा (मिरर शैली) लिखने का प्रयास करने लगे। फिर अभ्यास ऐसा बना कि उन्होंने कई किताबें लिख दीं। गोयल की लिखीं पुस्तकें पढ़ने के लिए आपको दर्पण का सहारा लेना पड़ेगा। उल्टे लिखे अक्षर दर्पण में सीधे दिखाई देंगे और जिन्हे आप आसानी से उसे पढ़ लेंगे।
पीयूष गोयल बताते हैं कि कुछ लोगों ने कहा कि आपकी लिखी किताबें पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत होगी। कुछ ऐसा करें कि दर्पण की जरूरत न पड़े। इसे ध्यान में रखते हुए पीयूष गोयल ने सुई से मधुशाला लिख दी। हरिवंश राय बच्चन की पुस्तक ‘मधुशाला’ को सुई से मिरर इमेज में लिखने में करीब ढाई माह का समय लगा। गोयल की मानें तो यह सुई से लिखी ‘मधुशाला’ दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सुई से लिखी गई है। आईये! एक नजर डालते है उनकी अदभुत कृतियों पर...

उल्टे अक्षरों से लिखी गई 'भागवत गीता'


उल्टे अक्षरो में लिखी भागवत गीता को आप देखेंगे तो एकबारगी भौचक्के रह जायेंगे, लेकिन आपको समझ में नहीं आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है। पर आप जैसे ही दर्पण (शीशे) के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी। सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे। मिलनसार पीयूष मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं।

सुई से लिखी 'मधुशाला'


पीयूष ने बताया कि अक्सर मुझसे ये पूछा जाता था कि आपकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत पड़ती है। पढ़ना उसके साथ शीशा, आखिर बहुत सोच समझने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यों न सूई से कुछ लिखा जाये सो मैंने सूई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘मधुशाला’ को लिख डाला, जिसे करीब 2 से ढाई महीने में पूरा किया। यह पुस्तक भी मिरर इमेज में लिखी गयी है और इसको पढ़ने लिए शीशे की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि रिवर्स में पेज पर शब्दों के इतने प्यारे मोतियों जैसे पृष्ठों को गुंथा गया है, जिसको पढ़ने में आसानी रहती हैं और यह सूई से लिखी ‘मधुशाला’ दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सूई से लिखी गई है।

मेंहदी कोन से लिखी गई 'गीतांजलि' 


पीयूष गोयल ने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ को ‘मेंहदी के कोन’ से भी लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू की और सभी 103 अध्याय 5 अगस्त 2012 को पूरे कर दिए। इसको लिखने में 17 कोन तथा दो नोट बुक प्रयोग में आई हैं। पीयूष ने श्री दुर्गा सप्त शती, अवधी में सुन्दरकांड, आरती संग्रह, हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में श्री साईं सत्चरित्र भी लिख चुके हैं। ‘रामचरितमानस’ (दोहे, सोरठा और चौपाई) को भी लिख चुके हैं।

कील से लिखी ‘पीयूष वाणी’  


अब पीयूष ने अपनी ही लिखी पुस्तक ‘पीयूष वाणी’ को कील से ए-4 साइज की एल्युमिनियम शीट पर लिखा है। पीयूष ने बताया कि वे इससे पहले दुनिया की पहली सुई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘मधुशाला’ को लिख चुके हैं। तो उन्हें विचार आया कि क्यों न कील से भी प्रयास किया जाये सो उन्होंने ए-फोर साइज के एल्युमिनियम शीट पर भी लिखा।

कार्बन पेपर की मदद से लिखी ‘पंचतंत्र’


गहन अध्ययन के बाद पीयूष ने कार्बन पेपर की सहायता से आचार्य विष्णुशर्मा द्वारा लिखी ‘पंचतंत्र’ के सभी ( पाँच तंत्र, 41 कथा) को लिखा है। पीयूष ने कार्बन पेपर को (जिस पर लिखना है) के नीचे उल्टा करके लिखा जिससे पेपर के दूसरी और शब्द सीधे दिखाई देंगे यानी पेज के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में और दूसरी तरफ सीधे दिखाई पड़ते है।


About Piyush Goel
Parents
Father - Mr. Devendra Kumar Goel and Mother - Smt. Ravikanta
Date of Birth
10 February, 1967
Birth Place
Dadri, India
Qualification
Diploma in Mechanical Engineering
Profession
Mechanical Engineer in a Multinational Company
Achievements
दुनिया की पहली मिरर इमेज पुस्तक श्रीमदभागवत गीता के रचनाकार हैं। सभी 18 अध्याय 700 श्लोक अनुवाद सहित हिंदी व अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लिखा है। दुनिया की पहली सुई से मधुशाला भी लिखी है। 3 पुस्तकें भी प्रकशित। इस के आलावा संस्कृत में श्री दुर्गा सत्सती, अवधी में सुन्दरकाण्ड, हिंदी व अंग्रेज़ी में श्रीसाईं चरित्र, श्री चालीसा संग्रह, मेहंदी से गीतांजलि (रबींद्रनाथ टैगोर कृत), कील से ‘पियूष वाणी’ एवं कार्बन पेपर से ‘पंचतंत्र’ (विष्णु शर्मा कृत) भी लिख चुके हैं
Hobbies
पीयूष गोयल संग्रह के भी शौक़ीन हैं, उनके पास प्रथम दिवश आवरण, पेन संग्रह, विश्व प्रसिद्ध लोगो के ऑटोग्राफ़ संग्रह भी हैं।


'औरत ही औरत की दुश्मन होती है' - जो जारी है...


पोंछा लगाते हुए गीता अक्सर आंसू पोंछ रही होती थी। मैं पूछती तो अपनी सास को गाली देते हुए कहती, करमजली मरती भी नहीं... जीना दूभर कर रखा है.. बेटे पर चलती नहीं.. मेरे को पीटती है... मेरी बेटी को पीटती है.. किसी दिन धक्का दे दूंगी उसे मैं... दीदी मेरे खसम के सामने मुंह नहीं खोलती बेटा है न उसका.. पिए पड़ा रहता है पर चूं नहीं करती.. दीदी ये औरत जात ही औरत की दुश्मन होती है...
उसके आंसुओं का टपकना बहने में बदल जाता। मैं कुछ नहीं कह पाती थी। मां उसे संभालने का मोर्चा संभालतीं। औरत ही औरत की दुश्मन होती है.. यह बचपन से सुनती आ रही हूं। किशोरावस्था में गरमी की दोपहरियों में चुपके से गृहशोभा पढ़ती तो उसकी कहानियों में अक्सर यह जुमला लिखा होता। दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक टॉप कॉलेज में पढ़ाई के दौरान जब एक महिला प्रफेसर प्रमोशन की रेस में दूसरी महिला से बाजी मार ले गई, तब भी यही जुमला सुना। ऑफिसेस में भी कई बार यही सुना। बस स्टॉप और फूड कॉर्नर्स पर तफरी करते समूहों के बीच भी दो औरतों के बीच की दुश्मनी के लिए यही सुना। यहां तक कि आमिर खान ने जब रीना को तलाक देकर किरण राव से शादी करने का फैसला लिया तब भी यही सुना!
क्या वाकई औरत ही औरत की दुश्मन होती है? अगर आप भी इस सवाल के जवाब में मुस्कुराते हुए मन ही मन हां का बटन दबा रहे हैं तो जनाब जागिए। तस्वीर का जो रुख दिखाया जा रहा है और सालों साल प्रचारित किया गया है, असल में उसमें सचाई है ही नहीं।
पितृसत्तात्मक शक्तियों ने बहुत बारीकी से समाज का ताना-बाना बुना है। इस बुनावट में इस बात का खास ख्याल रखा गया है कि लकड़ियों को कभी गठ्ठर में तब्दील न होने दिया जाए। वे गठ्ठर बन गईं तो भारी हो जाएंगी, संभालना। उनमें अपार शक्ति आ जाएगी, वह हक की मांग करने लगेंगी। इसलिए उन्हें बिखरी सूखी लकड़ियां ही बनी रहने दो। ऐसी ही कोशिशों के तहत धार्मिक दायरे बनाए गए, क्योंकि भाईचारा समाज के राजनीतिक आकाओं के लिए हानिकारक है। दलित जातियों के खेमे बनाए गए, ताकि कुछ मुठ्ठी भर समूहों (कथित तौर पर ऊंची जातियों) का वर्चस्व कायम रहे। और, ऐसी ही कोशिश के तहत महिलाओं को एक दूसरे के खिलाफ प्रचारित और तमाम तरीकों से एस्टेब्लिश किया जाने लगा, ताकि वे पुरुषों की उन ज्यादतियों पर ध्यान ही न दे सकें जिनके खिलाफ उन्हें लामबंद होना है। वे आपस में ही लड़-भिड़ मरें। वे एक दूसरे में अपना दुश्मन देखती-ढूंढती फिरें...
गौर से सोचिए, औरत औरत की दुश्मन है, यह कितना हास्यास्पद स्टेटमेंट है!! एक ही जेंडर के दो या दो से अधिक शख्स आखिर एक दूसरे के दुश्मन हो कैसे सकते हैं! उनकी शारीरिक बनावट एक जैसी है। उनकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक सरंचना लगभग एक जैसी है। गर्भाधान, पीएमएस, पीरियड्स और हॉरमोनल बदलावों से उपजीं तकलीफों को वे सभी अपनी-अपनी उम्र में झेलती हैं। उनके डर एक से हैं.. कभी रेप का, कभी छेड़छाड़ का, कभी गंदी नजरों का, कभी नौकरी जाने का, कभी जीवनसाथी से सेपरेशन का, कभी घर की मेड के एकाएक छोड़ जाने का, कभी आर्थिक मोर्चे पर लुट-पिट जाने का, कभी छल लिए जाने का..यहां तक कि कभी ब्रा की स्ट्रेप के दिख जाने का भी। साझे दुख, साझी तकलीफें और साझी सी भावनाएं पालने वालीं महिलाएं एक दूसरे की दुश्मन कब से होने लगीं! होती ही नहीं। शुद्धरूप में देखें तो वह एक दूसरे की दुश्मन हो ही नहीं सकतीं।


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पूजा प्रसाद जी एक पत्रकार है नई और दिल्ली से है। आप विभिन्न सामाजिक विषयों पर लिखती रहती है, आपके ब्लॉग पर अधिकतर लेख समाज में फैली कुरितियों और बुराईयों के खिलाफ है। जो समाज को जागरूक करने के लिए जरूरी है। आपसे ई-मेल pooprapoo@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है।


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September 27, 2016


Blog of the Week - Aapki Saheli | आपकी सहेली

इस सप्ताह से आई-ब्लॉगर के पाठको के लिए हम लेकर आए है Blog of the Week...। इस कॉलम में हम प्रत्येक सप्ताह एक ब्लॉग के बारे में आपको जानकारी देंगे। इसी कड़ी में इस सप्ताह हमने सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले ब्लॉग ‘आपकी सहेली’ को पहला ब्लॉग चुना है। जिसके लिए ब्लॉग की संचालिका को बधाई।

क्यो पढ़े यह ब्लॉग

सदियों से नारी पर अत्याचार होते रहे है और उड़ान भरने से पहले ही उसके पंख काट दिए जाते है और अशिक्षा के कारण नारी खुद भी अपने आप को दिन-हीन समझती है वो देखकर मन दुखी होता है। इस ब्लॉग के माध्यम से नारी मन को हीनभावना से मुक्त कराने का ब्लॉगर का उद्देश्य है।
वही, अंधविश्वास और आडम्बर जैसी कुरीतियों से जागरूक करने का प्रयास इस ब्लॉग में किया गया है। जिसमें अंधविश्वास से संबधित झूठे आडम्बरों की पोल खोलने की एक कोशिश है, क्योंकि मानना न मानना हमारे स्वयं के विवेक पर आधारित होता है।
इस ब्लॉग पर आपको घेरलू टिप्स, घर की साफ-सफाई, बच्चों की केयर, किचेन से संबधित ढ़ेरो अनसुनी और रोचक जानकारियां आपको मिलेगी। वहीं, कला पक्ष को लेकर देखा जाये तो यहां पर आप मेहंदी, रंगोली, नेल आर्ट सं संबधित नवीनतम डिज़ाइन बनाना सीख सकते है।
इसके साथ ही, इस ब्लॉग में खास यह है कि यहां पर आपको ढ़ेर सारी डिसेज बनाने की विधियां मिलेगी, जो गृहणी के अलावा लड़कियां भी नई-नई डिशेस बनाना सीख ही सकती है लेकिन जिन्हे रोज़मर्रा का खाना बनाना भी नही आता है उनके लिए भी यह बहुत मजेदार और रोचक हो सकता है। पढ़ाई के दौरान ज्यादातर वक्त होस्टलों में व्यतित होने से घर को सुव्यवस्थित रखने के छोटे-छोटे टिप्स लड़कियों को पता नहीं होते। ऐसे में यह ब्लॉग ऐसी लड़कियों के काम का साबित होगा।
साहित्य के नाम पर आपको निराशा हाथ लग सकती है, क्योंकि लेखिका का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और घेरलू टॉपिक्स पर को लेकर चलना है। जिसमें यह ब्लॉग वास्तव में ही सही दिशा में अग्रसर है।


Blog Profile | ब्लॉग परिचय
Blog
Since
03 March, 2014
Language
Hindi
Type
Multi Topical Blog
Total Post
134 Post
Blogger
Smt. Jyoti Dehliwal
Owner Mail
jyotidehliwal708@gmail.com


हमारा प्रयास है कि प्रत्येक सप्ताह एक ब्लॉग चयनित कर उसका उद्देश्य और पठन योग्य सामग्री की समीक्षा कर पाठकों और अन्य ब्लॉगरों के सामने प्रस्तुत करना। जिससे पाठक और अन्य ब्लॉगर ब्लॉग विशेष व ब्लॉगर के बारे में विस्तार से जान सकें। यदि आप इस कॉलम में अपने ब्लॉग को प्रकाशित कराना चाहते है तो अपने ब्लॉग का संक्षिप्त परिचय और ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य के साथ जानकारी एवं अपना फोटो हमें - iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।

September 24, 2016


'डॉटर्स डे' पर एक बेटी का अपने माता-पिता को पत्र


आदरणीय मम्मी-पापा,
सादर चरणस्पर्श।
परसों “डॉटर्स डे” (सितंबर का चौथा रविवार) है। आप दोनों सोशल मीडिया पर सक्रिय हो। आप दोनों का फ़ेसबुक पर अकाउंट है और व्हाट्सएप पर भी आप लोग कई ग्रुप में शामिल हो। ऐसे में जाहिर है कि आज आप लोग भी बेटियों पर कई मैसेजेस लाइक करेंगे, फॉरवर्ड करेंगे। बेटियों का गुनगान करेंगे। लेकिन ऐसे मैसेजेस फॉरवर्ड करने से पहले मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं, एक निवेदन करना चाहती हूं, जो शायद आपके समक्ष रहने पर नहीं कह पाती। छोटा मुंह और बड़ी बात करने के लिए माफी चाहती हूं।

मेरी भाभी याने आपकी बहू भी किसी की बेटी है अत: ... 
  • जो सम्मान और फ़िक्र आप मेरे लिए महसूस करते है, वहीं सम्मान और फ़िक्र आप भाभी के लिए भी महसूस क्यो नहीं करते?
  • जिस तरह कोई व्यंजन बनाते वक्त मुझसे यदि गलती से नमक/मिर्च ज्यादा या कम हो गया, तो भी आप गुस्सा नहीं होते थे। मम्मी, आप मुझे उस को कैसे सुधारना है यह समझाती थी। आप भाभी को भी ऐसे ही क्यों नहीं समझाती। आखिर भाभी भी तो किसी की बेटी है!
  • जिस तरह आप अपने दामाद से कहती है कि मेरा मन बहलाने के लिए कभी-कभी मुझे बाहर घुमाने, सिनेमा दिखाने या होटल में खाना खिलाने ले जाया करें… ठीक उसी तरह आप भैया से क्यों नहीं कहती कि भाभी को भी मन बहलाने के लिए कभी-कभी बाहर घुमाने, सिनेमा दिखाने या होटल में खाना खिलाने ले जाया करें…!
  • जिस तरह मेरा जन्म होने पर, एक लड़की होते हुए भी आपने मेरा बड़े प्यार से पालन-पोषण किया... तो भाभी को बेटी होने पर आप उन्हें क्यों कोसती हो? आप तो पढ़े-लिखें हो, आपको अच्छे से पता है कि बेटा या बेटी पैदा करना यह किसी भी नारी के अपने हाथ में नहीं है, फिर भी आप भाभी को ताने क्यों मारते हो? सच बताऊं उस वक्त मुझे बहुत दु:ख होता है!
  • जब भी मैं ससुराल में कुछ ख़रीददारी करती हूं...तो आप खुश होते है कि आपकी बेटी ससुराल में राज कर रहीं हैं। ठीक उसी तरह भाभी ने भी ख़रीददारी की ...तो भाभी पर फ़िज़ूलखर्ची का आरोप क्यों लगाते हो?

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे FACEBOOK पर फालो कर सकते है।


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September 22, 2016


आई-ब्लॉगर के साथ जुड़ी - ब्लॉगर रेखा श्रीवास्तव

नवोदित लेखक और ब्लॉगर रेखा जी के अनुभवों से उठा सकेंगे लाभ


इस सप्ताह गुरूवार को ब्लॉगर रेखा श्रीवास्तव जी आई-ब्लॉगर के साथ बतौर लेखक सदस्य जुड़ी है। रेखा जी का जन्म 07 जुलाई, 1955 को बुंदेलखण्ड के उरई कस्बे हुआ था। शिक्षा दीक्षा भी वही हुई। स्वभाव की संवेदनशीलता ने कलम हाथ में थमा दी जबकि लेखन और अध्ययन उन्हे पिता से विरासत में मिला। कहानी, कविता और लेखों में सामान्य रुचि रखती है। जब ये अर्न्तजाल या ब्लॉग नही हुआ करते थे तब आपके लेख स्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे और बाद में अपने ब्लॉग के लिए लेखन करने लगी। उनके कविताएं कई साझा कविता सग्रहों में प्रकाशित हो चुकी है। रेखा जी 24 सालों तक आईआईटी कानपुर में मशीन अनुवाद में रिसर्च एसोसिएट के पद पर कार्यरत रही है और अब वर्तमान में काउंसलर है।

रेखा जी के ब्लॉग से एक पोस्ट पाठकों के लिए पेश है, इसके साथ ही हम आपको बता दें कि पाठकों, नवोदित रचनाकारों और ब्लॉगरों को रेखा श्रीवास्तव जी के अनुभवों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।


आठ वर्ष ब्लॉगिंग के - मेरा सरोकार

आज मुझे अपने ब्लॉग को शुरु किये हुए आठ वर्ष हो गये। बहुत कुछ सीखा और अपने पाँच ब्लॉग बनाये हैं, अलग अलग उद्देश्य से। ईमानदारी से कहूँगी कि कुछ वर्षों तक तो उनके साथ न्याय कर पायी फिर कुछ  अन्य कार्यों में व्यस्तता और सामाजिक सरोकार में वृद्धि से समय कम दे पायी। 
इस बीच ब्लॉगिंग में भी गुटबाजी का असर देखा और लंबी लंबी कमेंट वाली लड़ाई भी देखी। हम कभी बोले जहाँ देखा कि बोलना जरूरी है। बहुत सहयोगी ब्लॉगर साथी हैं सभी। मैंने कई परिचर्चायें आयोजित की और सबसे बहुत सहयोग मिला। किसी ने ये नहीं सोचा कि नयी हूँ तो अपने विचार क्यों दें? लेकिन समकक्ष मानकर सबने जो साथ दिया अभिभूत हुई।
एक कटु अनुभव भी रहा, एक सामूहिक ब्लॉग ने मुझे अध्यक्ष बनाया और शायद सोचा था कि एक रबड़ स्टाम्प मिल गया। मैं पहले से उसकी सदस्य थी और फिर कुछ साथियों ने मना किया कि मैं इस पद को स्वीकार न करूँ क्योकि संस्थापक ही सर्वोपरि हैं। फिर भी मैंने चुनौती स्वीकार की और उस ब्लॉग के अतीत को देखते हुए सबसे पहले एक आचार संहिता बना कर ब्लॉग पर डाली और सबको मानने का अनुरोध भी था। कुछ दिन चला फिर वही वैमनस्य बुढ़ाने वाली पोस्ट आने लगी और आचार संहिता ताक पर। कई बार विनम्र अनुरोध के बाद भी कुछ रुका नहीं और मैंने पूरी तरह त्यागपत्र दे दिया।
फेसबुक के जलवे बढ़ने के साथ ब्लॉग के लिए अच्छा साबित नहीं हुआ और त्वरित प्रतिक्रिया को देखने के लालच ने सब कुछ वहीं केन्द्रित कर दिया। ब्लॉग सूने हो गये। हम सभी दोषी हैं इसके लिए और नवें वर्ष में प्रवेश के साथ ही रोज न सही लेकिन ब्लॉग पर निरन्तर लिखने के लिए प्रतिबद्धता स्वीकार करती हूँ और सभी ब्लॉग पर जाकर पढ़ने का भी प्रयास करूँगी। हम ही एक दूसरे के हौसले को बढ़ाने का काम करेंगे।

<<< ‘मेरा सरोकार’ ब्लॉग की अन्य रचनाएं पढ़े >>>



रेखा श्रीवास्तव जी पिछले आठ वर्षो से ब्लॉग की दुनिया में सक्रिय है और पांच ब्लॉगस का संचालन कर रही है। उन्होने अब तक लगभग 1000 पोस्ट लिखी है। रेखा जी से ई-मेल rekhasriva@gmail.com एवं फोन 09936421567, 09307043451 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है और उन्हे FACEBOOK पर फॉलो करें।


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September 21, 2016


Blogger Ajay Kumar Jha Become a Member of iBlogger

ब्लॉगर अजय कुमार झा iBlogger के सदस्य बने


इस सप्ताह अजय कुमार झा जी आई-ब्लॉगर के सदस्य (लेखक) के रूप में जुड़े है। 9 मई, 1973 को जन्में अजय जी की शिक्षा केंद्रीय विद्यालयों में पूरी हुई है और पिताजी फ़ौजी थे इसलिए नियमित स्थानान्तरण के कारण लगभग पूरे भारत में भ्रमण कर चुके है और माता जी गृहणी है। इसके साथ ही उनके परिवार में उनके एक बड़े भाई भी है।
अजय जी ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय के साथ स्नातक है, खुद को साबित और स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष 1996 में दिल्ली आ गये थे। पत्रकारिता में डिप्लोमा लेने के दौरान वर्ष 1998 में सरकारी सेवा में नियुक्ति हो गई। वर्तमान में दिल्ली की अधीनस्थ जिला न्यायालय में बतौर वरिष्ठ न्यायिक सहायक पद पर कार्यरत है और साथ ही विधि की शिक्षा भी जारी है।
अजय जी 2008 से ‘कोर्ट कचहरी’ नाम से ब्लॉग लिख रहे है जहां पर आपको कोर्ट और कचहरी से संबधित ढ़ेर सारी उपयोगी जानकारी मिलेगी, वो भी हिन्दी में, क्योंकि इस तरह की ब्लॉग बहुत कम होते है अगर होते भी तो वे अंग्रेजी में होते है। यहां पर उन्होने प्रयास किया है कि पाठक उनके ब्लॉग से खाली हाथ न जाने पाये।

‘कोर्ट कचहरी’ ब्लॉग को पढ़ने के लिए क्लिक करें

इसके साथ ही वे 2007 से ‘बुकमार्क’ नाम के ब्लॉग का संचालन भी कर रहे है, जहां पर उन्होने विभिन्न सामाजिक मुद्दों और यात्रा संस्मरण को विशेष स्थान दिया है। यहां पर आप विभिन्न पर्यटन स्थलों की जानकारी भी ले सकते है जो कि नये पर्यटक के लिए बेहतरीन ब्लॉग साबित हो सकता है।

‘बुकमार्क’ ब्लॉग को पढ़ने के लिए क्लिक करें

अजय जी कहते है कि पढने-लिखने का शौक कब हुआ, यह मुझे नहीं ठीक-ठीक नही मालूम है। वे कहते है कि मै कभी भी विद्यालय में मेधावी छात्र नहीं रहा, मगर बचपन में कॉमिक्स, लड़कपन में विजय विकास, कर्नल रंजीत, गुलशन नंदा जैसे उपन्यासों के बाद, जहां शैक्षणिक पाठ्यक्रम ने अंग्रेजी साहित्य के करीब किया तो बाद में हिंदी साहित्य दिल के भीतर तक बस गया। उन्होने बताया कि संपादक के नाम हज़ारों पत्र, दोस्तों को सैकडों चिट्ठियां लिखने की आदत ने आगे जाकर लेख, कहानियां, कविताएं, व्यंग्य पढना और लिखना आदत बन गये और अब एक जुनून बन गए हैं। अब तो लगता है कि जिंदगी कम है और किताबें ज्यादा तो जिंदगी खत्म होने से पहले जितना पढूं, जितना लिखूं कम है।

September 19, 2016


Blogger 'Reena Maurya' Became a part of iBlogger

ब्लॉगरों का आई-ब्लॉगर से जुड़ने का सिलसिला जारी है और इसी कड़ी में आज आई-ब्लॉगर के साथ रीना मोर्या जी जुड़ी है जो एक अध्यापिका है और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ज्ञान बांट रही है। रीना जी मुम्बई से है और सन् जुलाई, 2011 से ब्लॉग ‘मेरा मन पंछी सा’ का संचालन और इसके लिए लिख रही है। उन्होने अबतक लगभग डेढ़ सौ रचनाएं ब्लॉग के लिए लिखी है। उन्होने अपनी रचनाओं में घरेलू व सामाजिक और प्रकृति को स्थान दिया है और उन्हे कविताओं के रूप संजोया है। उन्होने कई कविताओं में रिश्तों और प्रेम की परिभाषा को लाजवाब शब्दों में पिरोकर पेश किया है। कुल मिलाकर कह सकते है कि राीना जी का कविताओं के लिए शब्दों का संयोजन काफी बेहतर है। पढ़े! उनके ब्लॉग से ली गई एक पोस्ट...

वो जन्म से वैश्या नहीं

वो जन्म से वैश्या नहीं
ना किया है उसने कोई पाप
घरवालों के भविष्य की खातिर
झेल रही संताप
बाबा उसका एकदम शराबी
माँ के ह्रदय में है खराबी
छोटे छोटे भाई - बहनों की
खातिर उसने घुँघरी पहने
अपनी अस्मत हर रात गंवाती 
फिर भी दिनभर मुस्काती
उस बेटी के हिम्मत के क्या कहने
दिन में माँ - बाबा की बिटिया है
भाई- बहनों की दीदी
रात में बन जाती है वो
लाली और सुरीली
जीवन उसका जैसे अभिशाप
नहीं बचा पाई वो बिटिया
खुद को करने से ये पाप
फिर भी आस है उसके मन में
की एकदिन उसके भाई- बहन
समझेंगे उसके त्याग,पीड़ा और जज्बात
और दिलाएंगे उसको 
इस दलदल से निजात
जीती है लेकर बस यही आस
और बेचती है अपना जिस्म हर रात।

<<< ‘मेरा मन पंछी सा’ ब्लॉग की अन्य रचनाएं पढ़े >>>



रीना मौर्या जी की रचनाओं को कई प्रतिष्ठित वेब पत्रिकाओं, समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं ने स्थान दिया है। इसी के साथ आप एक कलाकार भी है उनके ब्लॉग पर उनके द्वारा बनाए गये चित्र देखे जा सकते है। आपसे ई-मेल mauryareena72@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है और Facebook पर भी जुड़ सकते है।


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